जोधपुर। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) जोधपुर के परिवार के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण आया है। विभाग के अधिकारी नरपत को उनकी वीरता और साहस के लिए ‘पुलिस पदक (शौर्य)’ से सम्मानित किया जाना प्रस्तावित है.

अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण (घनश्याम सोनी)

नरपत के इस सम्मान पर एनसीबी जोधपुर के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी, आईआरएस ने गर्व व्यक्त किया है. विभाग की ओर से उनके अदम्य साहस, वीरता, त्याग और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को नमन किया गया है.

सुरक्षा बलों के लिए प्रेरणा

अधिकारियों ने बताया कि नरपत की यह उपलब्धि न केवल एनसीबी जोधपुर परिवार के लिए, बल्कि देश के समस्त सुरक्षा बलों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है. यह देश की सुरक्षा में तैनात हर अधिकारी और जवान के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है.

एनसीबी जोधपुर की ओर से दी गई बधाई

इस उपलब्धि पर एनसीबी जोधपुर परिवार और जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी की ओर से नरपत को हार्दिक बधाई दी गई है. विभाग की ओर से उनके उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र की सेवा में निरंतर सफलता प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं दी गई हैं.

जोधपुर जिले में प्रशासनिक बदलाव के बाद अब चुनावी बिगुल बजने की तैयारी है। जिले की चार नई नगर पालिकाओं में पहली बार अध्यक्ष और वार्डों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

अब नगर निगम के साथ-साथ 6 नगर पालिकाएं

​जोधपुर जिले में अब नगर निगम के साथ-साथ 6 नगर पालिकाएं हो गई हैं। इनमें भोपालगढ़, बालेसर, तिंवरी और मथानिया को पंचायत से क्रमोन्नत कर नगर पालिका का दर्जा दिया गया है। प्रशासनिक दृष्टि से यह एक बड़ा बदलाव है, जिसके बाद अब इन क्षेत्रों में पहली बार निकाय चुनाव कराए जाएंगे। इन चुनाव के साथ ही पहली बार इन चारों निकायों में अध्यक्ष और वार्डों के लिए कैटेगरी रिजर्व की जाएगी।

​नए निकायों में चुनावी सरगर्मी

​प्रशासनिक रूप से क्रमोन्नत होने के बाद, इन चार निकायों—भोपालगढ़, बालेसर, तिंवरी और मथानिया—में चुनाव की प्रक्रिया अब अपने महत्वपूर्ण चरण में है। स्थानीय लोगों और संभावित उम्मीदवारों के लिए यह एक नई चुनौती और अवसर है, क्योंकि यहाँ पहली बार नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव होगा।

​आरक्षण का ‘फॉर्मूला’ और निकाय प्रमुख के पद

​राज्य स्तर पर कुल 309 शहरी निकाय हैं। इस बार आरक्षण के लिए जो नया फॉर्मूला लागू किया गया है, उसके तहत:
​OBC वर्ग: 60 निकाय प्रमुखों के पद OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
​SC वर्ग: 50 निकायों में SC वर्ग के लिए निकाय प्रमुख का पद आरक्षित है।
​ST वर्ग: 11 निकायों में ST वर्ग के लिए निकाय प्रमुख का पद आरक्षित किया गया है।
​आरक्षण की इस प्रक्रिया में महिलाओं के लिए निर्धारित प्रावधानों को भी सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षित निकायों में महिला आरक्षण का प्रावधान अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, सामान्य वर्ग की सीटों पर भी महिला आरक्षण के तहत निकाय प्रमुख तय किए जाएंगे।

सीट आरक्षित होने का मतलब क्या है? (आरक्षण का गणित)

​आरक्षण को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है, लेकिन स्पष्ट नियमों के अनुसार इसका वर्गीकरण इस प्रकार है:
​1. अनारक्षित ओपन (General Open): इन सीटों पर सामान्य वर्ग के अलावा भी किसी भी वर्ग का व्यक्ति प्रत्याशी बन सकता है। यहाँ महिला या पुरुष कोई भी दावेदार हो सकता है।
​2. अनारक्षित महिला (Unreserved Female): इन सीटों पर सामान्य वर्ग के अलावा किसी भी वर्ग की महिलाओं को ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
​3. OBC ओपन (OBC Open): इन सीटों पर OBC वर्ग से पुरुष या महिला, कोई भी प्रत्याशी बन सकता है।
​4. OBC महिला (OBC Female): ये सीटें केवल OBC महिलाओं की दावेदारी के लिए सुरक्षित हैं।
​5. SC ओपन (SC Open): इन सीटों पर अनुसूचित जाति (SC) से पुरुष या महिला कोई भी प्रत्याशी बन सकता है।
​6. SC महिला (SC Female): इन सीटों पर केवल अनुसूचित जाति (SC) की महिला प्रत्याशी ही चुनाव लड़ सकती है।
​7. ST ओपन (ST Open): इन सीटों पर अनुसूचित जनजाति (ST) से पुरुष या महिला, कोई भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
​8. ST महिला (ST Female): इन सीटों पर केवल अनुसूचित जनजाति (ST) की महिला को ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है।

​चुनावी तैयारी का महत्व

​इन चार निकायों में पहली बार चुनाव होने से स्थानीय राजनीति में बदलाव की उम्मीद है। वार्डों के आरक्षण और अध्यक्ष पद के आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही चुनावी गठबंधन और प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर लगेगी। फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन नए निकायों में किस प्रकार का आरक्षण समीकरण बनता है और किन वर्गों के उम्मीदवारों को मुख्य मुकाबला लड़ने का मौका मिलता है।

बनाड़ क्षेत्र में पोर्टेबल मशीन से किया जा रहा था अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण, 50 हजार नकद और मशीन बरामद

जोधपुर। युगावर्त व्यास।

जोधपुर में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के खिलाफ पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बनाड़ थाना क्षेत्र स्थित एक नर्सिंग होम संचालक को कथित रूप से रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पर पोर्टेबल मोबाइल अल्ट्रासाउंड मशीन के माध्यम से गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण करने का आरोप है। कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके से एक गर्भवती महिला, पोर्टेबल मशीन तथा ₹50 हजार की नकद राशि बरामद की है।जोधपुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुरेन्द्रसिंह शेखावत के निर्देशन में जोधपुर पीसीपीएनडीटी टीम ने इस मामले की सूचना मिलते ही ​गंभीरता से लिया और इस सूचना की पुष्टि करते हुए जयपुर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया।

यह है मशीन जो मोबाइल पर लिंग परिक्षण करती है

पोर्टेबल मशीन कैसे करती है काम?

जांच में बरामद पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस आकार में सामान्य सोनोग्राफी मशीन की तुलना में काफी छोटा होता है। इसमें एक हैंडहेल्ड अल्ट्रासाउंड प्रोब (स्कैनर) होता है, जो केबल या वायर के माध्यम से मोबाइल फोन या टैबलेट से जुड़ जाता है। मोबाइल में इंस्टॉल विशेष एप्लिकेशन स्क्रीन (डिस्प्ले) का कार्य करता है। जब प्रोब को गर्भवती महिला के पेट पर चलाया जाता है तो यह सामान्य अल्ट्रासाउंड की तरह भ्रूण की तस्वीरें प्रदर्शित करता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी भी उपकरण का उपयोग भ्रूण का लिंग जानने या बताने के लिए करना भारत में PCPNDT Act के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है।

मुखबिर की सूचना पर जाल बिछाया

बनाड़ स्थित श्री सागर नर्सिंग होम के संचालक ओम प्रकाश चौधरी के खिलाफ पीसीपीएनडीटी सेल को लगातार भ्रूण लिंग परीक्षण कराने की शिकायतें मिल रही थीं। सूचना की पुष्टि मुखबिर के माध्यम से करने के बाद अधिकारियों को अवगत कराया गया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम का गठन कर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई।

आरोपी ओमप्रकाश चौधरी

रंगे हाथों गिरफ्तारी

टीम ने गुरुवार रात कार्रवाई करते हुए आरोपी को कथित रूप से भ्रूण लिंग परीक्षण करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, ₹50 हजार नकद और संबंधित अन्य सामग्री जब्त की गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह राशि गर्भवती महिला से लिंग परीक्षण के एवज में ली गई थी। मामले में जब्त सामग्री की जांच की जा रही है।

कार्यवाही करने वाली टीम।

जांच जारी

पीसीपीएनडीटी सेल अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कब से इस अवैध गतिविधि में संलिप्त था और उसके नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है तथा साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जोधपुर। युगावर्त व्यास।

रातानाडा स्थित माहेश्वरी जनोपयोगी भवन में शुक्रवार से तीन दिवसीय मारवाड़ मुद्रा प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। मारवाड़ कॉइन सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की प्राचीन मुद्रा विरासत, ऐतिहासिक सिक्कों और दुर्लभ संग्रहों से परिचित कराना है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर पुराने सिक्कों और नोटों की खरीद-फरोख्त के नाम पर हो रही ठगी के प्रति आमजन को जागरूक करना भी इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।

देशभर के 60 से अधिक कलेक्टर्स लगाएंगे स्टॉल

मारवाड़ कॉइन सोसायटी के पदाधिकारी आर.एस. विश्नोई और प्रेम कवाड़ ने बताया कि प्रदर्शनी में देशभर से 60 से अधिक कॉइन कलेक्टर्स अपने संग्रह के साथ भाग लेंगे। प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में आगंतुकों को प्राचीन सिक्के, कागजी मुद्रा, मेडल, डाक टिकट, ऐतिहासिक पेंटिंग तथा विभिन्न एंटीक वस्तुओं का दुर्लभ संग्रह देखने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवाओं को भारतीय मुद्रा के इतिहास और उसके महत्व की जानकारी दी जाएगी।

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सोशल मीडिया पर चल रहे फ्रॉड से किया जाएगा सतर्क

प्रदर्शनी के दौरान एक विशेष जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इसमें लोगों को बताया जाएगा कि सोशल मीडिया पर पुराने सिक्कों और नोटों को लाखों रुपये में खरीदने का लालच देकर किस प्रकार ठगी की जा रही है। सोसायटी आमजन को समझाएगी कि ठग रजिस्ट्रेशन शुल्क, फाइल चार्ज या अन्य बहानों से पैसे ऐंठते हैं और बाद में संपर्क समाप्त कर देते हैं। इस तरह के फर्जी ऑफर्स से बचने के लिए लोगों को जरूरी सावधानियां भी बताई जाएंगी।

कैसे करते है ठगी समझिए इस विडियों से :https://www.facebook.com/share/v/1C3LENzVEw/

5 रुपये के ट्रैक्टर नोट और 786 सीरीज के नाम पर ठगी का खुलासा

सोसायटी के अनुसार सोशल मीडिया पर 5 रुपये के ट्रैक्टर वाले नोट, 786 सीरीज के नोट, गैंडे वाली चवन्नी और वैष्णो देवी वाले सिक्कों के नाम पर भारी कीमत मिलने का दावा कर लोगों को भ्रमित किया जाता है। ठग आरबीआई के नाम पर फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराने, रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराने या फाइल चार्ज देने के नाम पर रुपए मांगते हैं। प्रदर्शनी में इन सभी तरीकों की जानकारी देकर लोगों को सतर्क किया जाएगा ताकि वे किसी भी ऑनलाइन ठगी का शिकार न हों।

मुद्रा संग्रहण की सही जानकारी भी मिलेगी

प्रदर्शनी में केवल दुर्लभ संग्रह ही नहीं, बल्कि मुद्रा शास्त्र (न्यूमिस्मैटिक्स) की बारीकियों पर भी जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ आगंतुकों को बताएंगे कि पुराने सिक्कों और नोटों का सही तरीके से संरक्षण कैसे किया जाए, उनकी ऐतिहासिक और संग्रहणीय महत्ता क्या होती है तथा किसी भी दुर्लभ मुद्रा का वास्तविक मूल्यांकन किन आधारों पर किया जाता है। आयोजकों का मानना है कि यह प्रदर्शनी इतिहास, संस्कृति और जागरूकता का अनूठा संगम साबित होगी।

जोधपुर, युगावर्त व्यास।

जोधपुर के राईकाबाग रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि स्टेशन परिसर में खड़ी एक मोटरसाइकिल के बैग में बम रखा हुआ है।

कंट्रोल रूम को मिली बम होने की सूचना

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के विभिन्न विभाग तत्काल सक्रिय हो गए। मौके पर उदयमंदिर थाना पुलिस, बम निरोधक दस्ता (Bomb Squad), डॉग स्क्वायड, एम्बुलेंस तथा दमकल की टीमें पहुंचीं और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू की गई।

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बम स्क्वायड और डॉग स्क्वायड ने संभाला मोर्चा

संदिग्ध मोटरसाइकिल के बैग की पहले मेटल डिटेक्टर से जांच की गई। बैग में रखे डिब्बे में धातु (मेटल) होने की पुष्टि होने के बाद सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए विशेष क्रेन/ग्रैबर उपकरण की सहायता से बॉक्स को बाहर निकाला गया।

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बॉक्स खुला तो नहीं मिला कोई बम

हालांकि, बॉक्स खोलने पर उसमें कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह पूरी कार्रवाई एक मॉक ड्रिल थी, जिसका उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारियों और रिस्पॉन्स टाइम का आकलन करना था।

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विभिन्न विभागों का रिस्पॉन्स टाइम किया गया रिकॉर्ड

इस मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस, बम स्क्वायड, डॉग स्क्वायड, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और अन्य संबंधित एजेंसियों के मौके पर पहुंचने तथा कार्रवाई करने के समय का रिकॉर्ड तैयार किया गया, ताकि भविष्य में किसी वास्तविक आपात स्थिति में और अधिक प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं होने पर लोकतांत्रिक विरोध की चेतावनी, रोगी हित में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए

जोधपुर, 27 अप्रैल
राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन (आरएनए) जोधपुर शहर इकाई ने मथुरादास माथुर (एमडीएम) चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठन ने अस्पताल में नर्सिंग अधिकारियों और मरीजों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं।

आम बैठक में बनी रणनीति

एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश जाट ने बताया कि संगठन की आम बैठक में अस्पताल के विभिन्न वार्डों एवं विभागों में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों से प्राप्त सुझावों और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में रोगी हित, नर्सिंग सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पताल प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए गए।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

ज्ञापन में प्रत्येक वार्ड में हर शिफ्ट में पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मचारी, हेल्पर, स्वीपर और सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई। साथ ही उनकी उपस्थिति वार्ड प्रभारी से सत्यापित कराने, सभी वार्डों में कंप्यूटर, प्रिंटर और निर्बाध सर्वर सुविधा उपलब्ध कराने तथा रोगी भार और बेड क्षमता के अनुसार नर्सिंग स्टाफ का वैज्ञानिक पुनर्विन्यास करने की मांग भी रखी गई।

इसके अलावा बेड उपलब्धता के आधार पर पारदर्शी भर्ती व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई है।

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सेवा सुविधाओं और सुरक्षा पर भी जोर

एसोसिएशन ने इवनिंग और नाइट सुपरवाइजर के लिए आपातकालीन संपर्क व्यवस्था, ब्लड ट्रांसपोर्ट सिस्टम, जवाबदेह केयरटेकर व्यवस्था, एमएसीपी, सर्विस बुक एवं अन्य सेवा संबंधी प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही सुरक्षित पार्किंग, आधुनिक क्रेच की स्थापना, उत्कृष्ट सेवा सम्मान में पारदर्शिता, वार्डों में अनधिकृत वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक, नाइट ड्यूटी में पारदर्शी रोटेशन प्रणाली और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

रोगी हित को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने कहा कि ज्ञापन का उद्देश्य केवल कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाना है।

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समाधान नहीं हुआ तो होगा लोकतांत्रिक विरोध

संगठन ने अधीक्षक से सभी मांगों पर सकारात्मक एवं समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन ने विश्वास जताया कि अस्पताल प्रशासन और नर्सिंग वर्ग के समन्वय से एमडीएम अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेगा।

जोधपुर, 25 जुलाई। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से एक महिला, दो युवक और तीन युवतियों के बिना बताए घर से लापता होने के मामले सामने आए हैं। वहीं, एक नाबालिग लड़की के लापता होने पर उसके पिता की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

तीन साल के बेटे और गहनों के साथ घर से गई महिला

राजीव गांधी नगर थाना क्षेत्र के मोकलावास निवासी एक युवक ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 23 जुलाई की सुबह उसकी पत्नी बिना बताए घर से चली गई। महिला अपने तीन वर्षीय बेटे को भी साथ ले गई। परिजनों के अनुसार वह घर से निकलते समय कीमती सामान और गहने भी अपने साथ ले गई।

दो युवक भी बिना बताए हुए लापता

करवड़ थाना क्षेत्र के केलावा गांव निवासी छगनी देवी ने रिपोर्ट में बताया कि उनका पुत्र किलाराम भील 17 अप्रैल को बिना बताए घर से चला गया। करीब साढ़े तीन माह तक तलाश करने के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला।

इसी तरह माता का थान थाना क्षेत्र के बासनी तंबोलिया निवासी जगदीशप्रसाद भील ने बताया कि उनका पुत्र अक्षय कुमार 21 जुलाई की सुबह बिना बताए घर से निकल गया और अब तक वापस नहीं लौटा।

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तीन युवतियों की गुमशुदगी दर्ज

मंडोर थाना क्षेत्र में नागौरी बेरा, मंडोर रोड निवासी एक महिला ने अपनी पुत्री के 21 जुलाई से लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चल सका।

सूरसागर थाना क्षेत्र के भुरटिया निवासी एक व्यक्ति ने भी 23 जुलाई को अपनी पुत्री के बिना बताए घर से चले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई।

वहीं, झंवर थाना क्षेत्र के पुरोहिता का बास, पीपरीयाली धवा निवासी एक व्यक्ति ने भी अपनी पुत्री के लापता होने की सूचना पुलिस को दी है।

नाबालिग के लापता होने पर अपहरण का मामला दर्ज

बासनी थाना क्षेत्र के इंद्रा नगर निवासी एक व्यक्ति ने रिपोर्ट में बताया कि उनकी नाबालिग पुत्री 18 जुलाई को बिना बताए घर से चली गई। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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पुलिस कर रही तलाश

सभी मामलों में संबंधित थाना पुलिस ने गुमशुदगी अथवा अपहरण का मामला दर्ज कर लापता लोगों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस परिजनों से मिली जानकारी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।

जोधपुर, 25 जुलाई। शहर और ग्रामीण क्षेत्र में अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाओं की मौत हो गई। एक महिला की बाथरूम में सांप के काटने से जान चली गई, जबकि दूसरी महिला की छिड़काव करने वाले गलत पेय सेवन करने के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। दोनों मामलों में संबंधित थाना पुलिस ने मर्ग दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बाथरूम में सांप ने काटा, इलाज के दौरान महिला की मौत

प्रतापनगर थाना पुलिस के अनुसार ज्योतिनगर, चांदणा भाखर निवासी विष्णु मेघवाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 23 जुलाई की सुबह उनकी मां सुमन देवी (पत्नी स्व. नेनाराम मेघवाल) बाथरूम गई थीं। इसी दौरान उन्हें सांप ने काट लिया।

परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

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कीटनाशक सेवन के बाद विवाहिता ने तोड़ा दम

झंवर थाना क्षेत्र के लोरड़ी देजगरा गांव निवासी शिवलाल सुथार ने रिपोर्ट में बताया कि उनकी विवाहिता बहन ने 21 जुलाई को अपने पीहर में छिड़काव करने वाले गलत पेय सेवन कर लिया था। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

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सात वर्ष से कम वैवाहिक अवधि होने पर मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम

पुलिस के अनुसार मृतका की शादी को सात वर्ष से कम समय हुआ था। ऐसे मामलों में नियमानुसार मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस मौत के कारणों की विस्तृत पड़ताल कर रही है।

जोधपुर, 25 जुलाई। यदि ग्राहक से NEFT फॉर्म भरते समय खाता संख्या में एक अंक की त्रुटि हो जाए, तो केवल ग्राहक ही नहीं बल्कि बैंक की भी जांच और सत्यापन की जिम्मेदारी बनती है। राज्य उपभोक्ता आयोग, जोधपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में HDFC बैंक और यूनियन बैंक दोनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।

क्या है पूरा मामला?

परिवादी रतनलाल ने अपनी लेनदार फर्म लक्ष्मी एजेंसी, जयपुर को ₹50,000 का भुगतान करने के लिए यूनियन बैंक के माध्यम से NEFT फॉर्म जमा किया। फॉर्म में लाभार्थी का नाम, बैंक और IFSC कोड सही दर्ज थे, लेकिन खाता संख्या में एक अंक गलती से गलत लिख दिया गया।

इस त्रुटि के कारण राशि वास्तविक लाभार्थी के बजाय मनदीप कुमार नामक व्यक्ति के खाते में जमा हो गई। बाद में पता चला कि संबंधित खाता पहले से माइनस बैलेंस में था और जमा हुई राशि खाते के समायोजन में चली गई।

बैंक के चक्कर काटने के बाद उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला

रतनलाल ने राशि वापस दिलाने के लिए बैंक से कई बार संपर्क किया, लेकिन समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग, जैसलमेर में परिवाद दायर किया। जिला आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय दिया, जिसके खिलाफ HDFC बैंक ने राज्य आयोग में अपील की।

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बैंकों ने क्या दलील दी?

HDFC बैंक ने कहा कि संबंधित खाता व्यावसायिक उद्देश्य से संचालित था, इसलिए परिवादी उपभोक्ता की परिभाषा में नहीं आता। बैंक का यह भी कहना था कि गलत खाते में गई राशि खाते के माइनस बैलेंस में समायोजित हो गई और खाताधारक ने भी राशि लौटाने से इनकार कर दिया, इसलिए बैंक की कोई सेवा में कमी नहीं है।

वहीं, यूनियन बैंक ने दलील दी कि ग्राहक ने स्वयं गलत खाता संख्या दर्ज की थी। RBI की गाइडलाइन के अनुसार राशि का ट्रांसफर केवल खाता संख्या के आधार पर किया जाता है, इसलिए बैंक की कोई लापरवाही नहीं है।

राज्य आयोग ने क्या कहा?

आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छावाहा एवं सदस्य लियाकत अली ने कहा कि यह सही है कि ग्राहक से खाता संख्या में एक अंक की गलती हुई, लेकिन IFSC कोड और लाभार्थी का नाम सही था।

आयोग ने RBI की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि बैंक में मेकर-चेकर सिस्टम लागू होना चाहिए, जिसमें एक कर्मचारी डेटा दर्ज करे और दूसरा उसका सत्यापन करे। लाभार्थी के नाम और खाता संख्या का मिलान कर यह सुनिश्चित करना बैंक की जिम्मेदारी है कि भुगतान सही खाते में जाए।

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RBI गाइडलाइन पर आयोग की टिप्पणी

आयोग ने कहा कि कोर बैंकिंग प्रणाली में भुगतान मुख्य रूप से खाता संख्या के आधार पर होता है, लेकिन लाभार्थी का नाम भी जोखिम मूल्यांकन, लेनदेन की प्रकृति और पोस्ट-क्रेडिट सत्यापन के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसलिए बैंक केवल खाता संख्या देखकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते।

आयोग का फैसला

राज्य उपभोक्ता आयोग ने HDFC बैंक की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग, जैसलमेर के निर्णय को बरकरार रखा। आयोग ने HDFC बैंक और यूनियन बैंक दोनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार माना और उपभोक्ता को राहत देने का आदेश दिया।

सुनवाई में कौन-कौन रहे उपस्थित

अपीलार्थी HDFC बैंक की ओर से अधिवक्ता दिलीप चौहान और हिमांशु सोलंकी उपस्थित हुए, जबकि परिवादी रतनलाल की ओर से अधिवक्ता जोगेंद्र भारती ने पक्ष रखा।

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उदयपुर धर्म परिवर्तन मामले में सिंडिकेट के आरोपियों की जमानत खारिज, कोर्ट ने कहा- ‘गंभीर मामला, जांच जारी’

हाईकोर्ट की दोटूक: न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल की एकल पीठ ने याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों की संलिप्तता प्रथम दृष्टया साबित हो रही है।

​अंकुर नरूला कनेक्शन: दुर्ग (छत्तीसगढ़) के अमित कुमार और उदयपुर के हरीश के बीच अंकुर नरूला से धर्मांतरण बिल के विरोध और वित्तीय लेनदेन के मैसेज मिले।
​ऋषभदेव में धर्म परिवर्तन कैंप: उदयपुर के ऋषभदेव में टेंट लगाकर और जमीन की व्यवस्था कर कैंप आयोजित करने का आरोप।
​चालान के बाद छूट: अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा चालान (चार्जशीट) दाखिल करने के बाद ही आरोपी नई जमानत याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

क्या है पूरा मामला?

​राजस्थान के उदयपुर जिले के ऋषभदेव क्षेत्र में कथित तौर पर धर्म परिवर्तन (धर्मांतरण) गतिविधियों को बढ़ावा देने और कैंप आयोजित करने के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत अर्जी ([CRLMB-9344/2026]) दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट की जयपुर पीठ के न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल की अदालत ने मामले की गंभीरता और पुलिस केस डायरी का अवलोकन करने के बाद सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी – ‘सबूतों से हो सकती है छेड़छाड़’

​मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केस डायरी का गहनता से अध्ययन किया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि:
​”जांच अभी प्रारंभिक और महत्वपूर्ण चरण में है तथा कुछ अन्य आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। ऐसे में संगठित सिंडिकेट (Organized Syndicate) के रूप में काम कर रहे इन आरोपियों को जमानत पर रिहा करने से जांच प्रभावित हो सकती है और वे साक्ष्यों/सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।”
​अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए इस चरण पर जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।

केस डायरी से खुलासा – आरोपियों की भूमिका (Role of Accused in Syndicate)

​पुलिस जांच और केस डायरी के आधार पर हाईकोर्ट के आदेश में सभी आरोपियों की अलग-अलग भूमिका का उल्लेख किया गया है:
​अमित कुमार (दुर्ग, छत्तीसगढ़): ‘अनुग्रह ज्योति संस्थान’ नामक संस्था का मालिक है, जो धार्मिक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार में शामिल है। यह छत्तीसगढ़ से पलाश और आशीष के साथ उदयपुर आया था। केस डायरी के अनुसार, इसके मोबाइल से अंकुर नरूला के साथ ‘धर्मांतरण बिल’ के विरोध पर चर्चा और भारी वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले हैं।
​हरीश (उदयपुर): उदयपुर की ‘अपम एंड शालोमी वेलफेयर सोसाइटी’ का संचालन करता है। इसने राजस्थान में धार्मिक गतिविधियों और धर्मांतरण की सूचनाएं अंकुर नरूला के साथ साझा कीं। दोनों के बीच लगातार पैसे का लेन-देन (Monetary Transactions) भी हुआ है।
​पलाश और आशीष: ये अमित कुमार की संस्था का कामकाज संभालते हैं और दुर्ग से उदयपुर के ऋषभदेव कैंप में साथ आए थे।
​बाबूलाल: इसने ऋषभदेव में कैंप आयोजित करने के लिए जमीन की व्यवस्था की थी। इसके घर से धार्मिक पुस्तकें बरामद हुई हैं।
​प्रभुलाल (हरीश का ससुर): इसने कैंप के लिए टेंट और बुनियादी व्यवस्थाएं जुटाने में मदद की।
​भेरूलाल व सोहन: भेरूलाल (प्रभुलाल का बेटा) और सोहन (बाबूलाल का चचेरा भाई) ने कैंप संचालन और टेंट लगाने का काम संभाला।
​शंकर, राकेश, अनिल, नारायण और दिनेश: ये सभी बाबूलाल के जरिए हरीश से जुड़े और ऋषभदेव में धर्मांतरण कैंप के आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया।

‘अंकुर नरूला’ और फंडिंग का नेटवर्क

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू अंतरराज्यीय नेटवर्क और फंडिंग का सामने आया है। केस डायरी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के अमित कुमार और राजस्थान के हरीश, दोनों मुख्य आरोपी ‘अंकुर नरूला’ नामक व्यक्ति के संपर्क में थे।
​इनके बीच धार्मिक परिवर्तन बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और धर्मांतरण की गतिविधियों को बढ़ाने को लेकर टेक्स्ट मैसेज के जरिए बातचीत हुई थी। इसके अलावा, संस्थाओं और व्यक्तिगत खातों के बीच हुए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की भी विस्तृत जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

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न्यायालय का अंतिम आदेश – चालान पेश होने तक राहत नहीं

न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल ने मामले की गंभीरता, आरोपियों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता और लंबित जांच को देखते हुए आदेश जारी किया:
​”तथ्यों और परिस्थितियों के कुल योग पर विचार करते हुए यह न्यायालय इस चरण में याचिकाकर्ताओं को जमानत देने का इच्छुक नहीं है। तदनुसार, ये जमानत याचिकाएं खारिज की जाती हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता पुलिस द्वारा चालान (आरोप पत्र) पेश किए जाने के बाद नई जमानत याचिकाएं दायर करने के लिए स्वतंत्र होंगे।”

​निष्कर्ष

​उदयपुर के ऋषभदेव धर्मांतरण मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि संगठित तरीके से चलाए जा रहे कथित धर्म परिवर्तन सिंडिकेट पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस द्वारा चालान दाखिल किए जाने तक आरोपियों को जेल में ही रहना होगा।

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